16 मुखी रुद्राक्ष महामृत्युंजय शिव का प्रतीक माना जाता है। सुरक्षा, भय से मुक्ति, आत्मबल और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए धारण किया जाता है।
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16 मुखी रुद्राक्ष पर चंद्रमा का शासन होता है।
यह भगवान महामृत्युंजय का स्वरूप भी कहलाता है।
इसे पहनने वाले को सोलह सिद्धियों ज्ञान प्राप्त होता है।
सोलह मुखी रुद्राक्ष विष्णु और शिव का संयुक्त रूप है और विजय प्राप्त होने का प्रतिनिधित्व करता है।
यह रूद्राक्ष “केतु” द्वारा शासित माना गया है तथा केतु के बुरे प्रभावों से बचाता है।
यह रूद्राक्ष की दुर्लभ किस्मों में से एक है। इस रूद्राक्ष को पहनने से व्यक्ति भगवान की भक्ति पाता है और सत्य को निभाते हुए अपने जीवन और सात जन्म के पुण्य लाभ पाते हैं।
माना जाता है कि अर्जुन ने जब मछली की आँख को साधा था तब उन्होंने इसी रुद्राक्ष को धारण कर रखा था। अत: इस रूद्राक्ष को पहनने के बाद व्यक्ति असाधारण क्षमता को पाता है। वह शक्तिशाली व्यक्ति बन जाता है।
यह रूद्राक्ष समस्त सुखों का भोग कराता है तथा सभी पापों से मुक्त करने में सहायक है। व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नही सताता तथा जिस घर में 16 मुखी रूद्राक्ष रखा हो वह घर चोरी, डकैती, या आग की समस्याओं से मुक्त होता है।
सोलह मुखी रुद्राक्ष को उपयोग में लाने से पक्षपात जैसे रोग भीदूर हो जाते हैं शरीर की सूजन, गले संबंधी रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है. तपेदिक, कुष्ठ रोग, फेफड़ों के रोगों जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए लाभदायक है।
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