1 Mukhi Indian+2 to 14 Mukhi With Gauri Shankar Indonesion Mala

एक मुखी रुद्राक्ष यह साक्षात भगवान शिव का स्वरुप माना जाता है इसमें स्वयं भगवान शिव विराजमान हैं

दो मुखी रुद्राक्ष मे दो धारी होती है। यह रुद्राक्ष अर्धनारीश्वर स्वरुप है इसको धारण करने से भगवान शिव और माता पार्वती हमेशा खुश रहते हैं दों मुखी रुद्राक्ष गोहत्या जैसे पापों से भी मुक्ति दिलाता है

तीन मुखी रुद्राक्ष में तीन धारिया होती है इसे अग्नि स्वरुप माना जाता है। यह सत रज तथा तम इन तीनो का त्रिगुणात्मक शक्ति रुप है।

चार मुखी ब्रह्म जी का स्वरुप माना जाता है। इसमे चार धारिया होती है इसे चार वेदों का रुप भी माना जाता है यह मनुष्य  को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चतुवर्ग देने वाला है।

पाँच मुखी रुद्राक्ष साक्षात रुद्र स्वरुप है, इसके पाँचो मुखो को भगवान शिव का पंचानन स्वरुप माना गया है।

छः मुखी रुद्राक्ष शिवजी के बेटे कार्तिकेय का स्वरुप है इसमे छः धारियां है यह विद्या ज्ञान बुद्धि का प्रतीक है यह विद्या अध्ययन में अद्भुत शक्ति देता है।

यह रुद्राक्ष सात आवरण पृथ्वी, जल, वायु, आकाश, अग्नि, महत्व व अहंकार का स्वरुप है। इससे धारक को लक्ष्मी प्राप्त होती है।

आठ मुखी रुद्राक्ष को विनायक का रुप माना गया है। इसको धारण करने से धारक की विध्न बाधाये दूर होती है और आठों दिशाओं मे विजय प्राप्त होती है।

नौ मुखी रुद्राक्ष यह रुद्राक्ष नव शक्तियों से संपन्न है। धारक को न केवल तीर्थों पशुपति, सोमनाथ, पारसनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथ, आदि तीर्थों का फल प्राप्त होता है इसे धर्मराज का स्वरुप माना गया है।

दस मुखी रुद्राक्ष में १० धारियाँ होती हैं। इसे भगवान विष्णु का स्वरुप माना गया है इसे पहनने से दस देवता अति प्रसन्य होते हैं और धारक को अनेक प्रकार की दिव्या शक्तियाँ प्रदान करते हैं।

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष में ग्यारह धारियां होती है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष भी रुद्र स्वरुप है यह भगवान शिव के भ्रक्तो के लिए बहुत ही प्रभावशाली तथा अमोध वस्तु है

बारह मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप है। इसके देवता बारह सूर्य है। भगवान सूर्य संसार को चलाने वाला देवता है।

तेरह मुखी रूद्राक्ष भगवान इन्द्र का स्वरूप माना जाता है। इसको धारण करने से इन्द्र भगवान खुश होते है, जिससे ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है!

चौदह मुखी रूद्राक्ष रूद्र के नेत्र से प्रकट हुआ रूद्राक्ष है यह अत्यन्त दुर्लभ रूद्राक्ष मे माना जाता है परम प्रभावशाली तथा अल्प समय मे ही भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला है!

श्री गौरी शंकर रूद्राक्ष

प्राक्रतिक रूप से परस्पर जुड़े दो रूद्राक्षों को गौरी शंकर रूद्राक्ष कहा जाता है इसे भगवान शिव और माता गौरी का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस रूद्राक्ष का नाम गौरी शंकर रूद्राक्ष पड़ है इसमे भगवान शिव और माता पार्वती दिव्य शक्तियां विराजमान है इसको धारण करने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनो ही प्रसन्न होते है

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एक मुखी रुद्राक्ष यह साक्षात भगवान शिव का स्वरुप माना जाता है इसमें स्वयं भगवान शिव विराजमान हैं एक मुखी रुद्राक्ष के बारे में कहा जाता है कि इसके दर्शन मात्र से ही मानव का कल्याण होता है पूजन से या धारण करने से क्या नहीं हो सकता, जो यह ब्रह्म-हत्या जैसे महापाप को नष्ट करता है जिस घर में एक मुखी रुद्राक्ष होता है वहां लक्ष्मी जी का आगमन हमेशा रहता है इससे धारणकर्ता को कभी कोई नुकसान या भय नही रहता, ये सभी प्रकार के रुद्राक्षों में सर्व़श्रेष्ठ माना जाता है एक मुखी रुद्राक्ष की पूजा करने से मनवांछित फल प्राप्त होते हैं और शत्रु खुद ही पराजित हो जाते है।

दो मुखी रुद्राक्ष मे दो धारी होती है। यह रुद्राक्ष अर्धनारीश्वर स्वरुप है इसको धारण करने से भगवान शिव और माता पार्वती हमेशा खुश रहते हैं दों मुखी रुद्राक्ष गोहत्या जैसे पापों से भी मुक्ति दिलाता है इसको धारण करने से दिमाग चुस्त और बुद्धि जागृत होती है। इसको धारण करने से सर्व मनोरथ पूरे होते हैं। कार्य व्यापार में लाभ होता है पति-पत्नी अगर दोनो इस रुद्राक्ष को धारण करते हैं तो आपसी प्यार बढता है और क्लेश जड़ से खत्म होता है। इसका स्वामी ग्रह चन्द्रमा माना जाता है। इसको धारण करने से पेट के विकार गैस कब्ज महिलाओं के सीने की समस्या लिम्फेटिक और नानोम्स फलूड सिस्टम को सही करने में सहायक है इसे धारण करने से संतान में लाभ पिता और पुत्र गुरु शिष्य के सम्बन्धों में मधुरता आती है।

तीन मुखी रुद्राक्ष में तीन धारिया होती है इसे अग्नि स्वरुप माना जाता है। यह सत रज तथा तम इन तीनो का त्रिगुणात्मक शक्ति रुप है। इस रुद्राक्ष मे ब्रह्म-विष्णु-महेश तीनों की शक्तियों का समावेश है इसमें तीनो लोक आकाश, पृथ्वी, पाताल की भी शक्तियां निहित होती है इससे मनुष्य को भूत भविष्य और वर्तमान के बारे में जानकारी होती है। जो विधार्थी पढ़ने मे कमजोर है। इसे धारण करने से अद्भुत लाभ मिलता है इसका स्वामी ग्रह मंगल माना गया है। सेक्स ग्लैंड रेड ब्लड सैल इन्टरनल ग्लैंड पेट के विकार और ब्लैड प्रेशर डिस आर्डर दूर होते है। इसको धारण करने वाला व्यक्ति गलत कर्मो के कारण मिलें पाप, हीन भावना से ग्रस्त, दूसरों से भय खाने वाले, आत्मगलिन के शिकार लोगो को जरुर पहनना चाहिए।

चार मुखी ब्रह्म जी का स्वरुप माना जाता है। इसमे चार धारिया होती है इसे चार वेदों का रुप भी माना जाता है यह मनुष्य  को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चतुवर्ग देने वाला है। यह चारो वर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य वा शूद्र तथा चारों आश्रम-ब्रह्माचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ तथा सन्यास के द्वारा पूजित और परम वन्दनीय है। जो विद्यार्थी पढने में कमजोर हो या बोलने में अटकता हो उसे ये रुद्राक्ष जरुर धारण कराये चार मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक रोगो से शान्ति मिलती है

पाँच मुखी रुद्राक्ष साक्षात रुद्र स्वरुप है, इसके पाँचो मुखो को भगवान शिव का पंचानन स्वरुप माना गया है। इसमे पाँच धारिया होती है यह रुद्राक्ष हृदय को स्वच्छ,मन को शान्त,दिमाग को ठंडा रखता है इसको धारण करने वाला मनुष्य उन्नति के रास्ते पे चलता है यह पर स्त्री गमग के पाप नष्ट होते है। और धारक को किसी भी प्रकार का दुख नही सताता इसके गुण अनन्त है।

छः मुखी रुद्राक्ष शिवजी के बेटे कार्तिकेय का स्वरुप है इसमे छः धारियां है यह विद्या ज्ञान बुद्धि का प्रतीक है यह विद्या अध्ययन में अद्भुत शक्ति देता है। और हमे  काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर जैसी बुराइयों से बचाता है इसको पहनने से मनुष्य की खोई हुई शक्तियां जाग्रत होती है इससे हमारी याददाश्त बढाता है।इसको धारण करने से अनेक प्रकार के रोग जैसे चर्म रोग, हृदय की दुर्बलता तथा नेत्र रोग दूर होते है।

यह रुद्राक्ष सात आवरण पृथ्वी, जल, वायु, आकाश, अग्नि, महत्व व अहंकार का स्वरुप है। इससे धारक को लक्ष्मी प्राप्त होती है। धन-सम्पत्ति, कीर्ति प्रदान करता है इसे धारण करने से नौकरी में तरक्की, व्यापार मे वृ़द्धी और ईश्वर भक्ति प्रबल होती है। आर्थिक, मानसिक, शारीरिक विपत्तियो से रक्षा करता है।

आठ मुखी रुद्राक्ष को विनायक का रुप माना गया है। इसको धारण करने से धारक की विध्न बाधाये दूर होती है और आठों दिशाओं मे विजय प्राप्त होती है, कोर्ट कचहरी के चक्रों मे सफलता प्राप्त होती है इसमे आठ धारियां होती है ये श्री गणेश भगवान का स्वरुप है भगवान गणेश जी की सभी भगवानों से पहले पूजा की जाती है

नौ मुखी रुद्राक्ष यह रुद्राक्ष नव शक्तियों से संपन्न है। धारक को न केवल तीर्थों पशुपति, सोमनाथ, पारसनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथ, आदि तीर्थों का फल प्राप्त होता है इसे धर्मराज का स्वरुप माना गया है।

दस मुखी रुद्राक्ष में १० धारियाँ होती हैं। इसे भगवान विष्णु का स्वरुप माना गया है इसे पहनने से दस देवता अति प्रसन्य होते हैं और धारक को अनेक प्रकार की दिव्या शक्तियाँ प्रदान करते हैं। इसे दशावतार मत्स्य, कच्छप, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्णा, बुद्ध, कल्कि के स्वरुप का प्रतीक है।

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष में ग्यारह धारियां होती है ग्यारह मुखी रुद्राक्ष भी रुद्र स्वरुप है यह भगवान शिव के भ्रक्तो के लिए बहुत ही प्रभावशाली तथा अमोध वस्तु है इसको धारण करने से सदा सुख में वृद्धि होती है भगवान इन्द्र को इसका प्रधान देवता माना जाता है यदि किसी मनुष्य की दान करने की इच्छा हो और वो दान ना कर सका हो तो ऐसे मनुष्य को  ग्यारह मुखी रुद्राक्ष जरुर धारण करना चाहिए इससे उस दान की पूर्ति हो जाती है इसके बारे मे कहा जाता है

बारह मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप है। इसके देवता बारह सूर्य है। भगवान सूर्य संसार को चलाने वाला देवता है। सम्र्पूण पृथ्वी सूर्य भगवान की कृपा पर निर्भर है। जिस प्रकार सूर्य सारी दुनिया को रोशनी प्रदान करता है। ऐसे ही बारह मुखी रुद्राक्ष मनुष्य की ख्याति सभी दिशाओं में फैलाता है।

तेरह मुखी रूद्राक्ष भगवान इन्द्र का स्वरूप माना जाता है। इसको धारण करने से इन्द्र भगवान खुश होते है, जिससे ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है! इसको धारण करने से सभी प्रकार की मनोकामनाये पूरी होती है। यश की प्राप्ति होती है। और सम्पूर्ण इच्छायें पूरी होती है।

चौदह मुखी रूद्राक्ष रूद्र के नेत्र से प्रकट हुआ रूद्राक्ष है यह अत्यन्त दुर्लभ रूद्राक्ष मे माना जाता है परम प्रभावशाली तथा अल्प समय मे ही भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला है! चौदह मुखी रूद्राक्ष साक्षात देवमणि है! यह दुर्लभ होने के साथ साथ बहुत ही महत्वपूर्ण है।

श्री गौरी शंकर रूद्राक्ष

प्राक्रतिक रूप से परस्पर जुड़े दो रूद्राक्षों को गौरी शंकर रूद्राक्ष कहा जाता है इसे भगवान शिव और माता गौरी का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस रूद्राक्ष का नाम गौरी शंकर रूद्राक्ष पड़ है इसमे भगवान शिव और माता पार्वती दिव्य शक्तियां विराजमान है इसको धारण करने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनो ही प्रसन्न होते है यह रूद्राक्ष मानव को हर प्रकार के रूद्राक्षो से होने वाले लाभ को अकेले ही दिलवाता है जो लोग एक मुखी या चैदह मुखी रूद्राक्ष पहनना चाहते है और किसी कारणवश नही पहन पाये वो गौरी शंकर रूद्राक्ष जरूर धारण करे इसे आप तिजोरी या गले  मे भी डाल सकते है और पूजा के स्थान पे भी रखना बेहद शुभ होता है इसे सोने या चांदी मे मढवा कर पहनना बहुत शुभ होता है गौरी शंकर रूद्राक्ष को पहनने या पूजन से आशा से भी अधिक सन्तोषजनक होता है इसको पहनने से पति पत्नी मे आपसी प्यार बढता है और पारिवारिक शान्ति मिलती है।

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