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1 Mukhi Double Savar Nepali Ganesh Rudraksha

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Approx Size: 21.37 mm

Approx Weight: 4.20 gm

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One Mukhi Double Savar Rudraksh

One Mukhi Double Savar Rudraksha is made up of, one Mukhi  Rudraksha and the other Mukhi Rudrakshas. On seeing it closely it resembles One Mukhi Rudraksha riding another Rudraksha, which has led to its name Savar Rudraksha. This Rudraksha is very rare and is not found easily in nature.  It is blessed by Lord Shiva and it is considered as the form of Lord Shiva. About One Mukhi Savar Rudraksha is said that only by seeing it the welfare of humans is done and what can not be done by worshiping or holding it.

The arrival of Lakshmi Ji always remains there where this rudraksha is worshiped. By wearing this rudraksha there is no loss of prosperity and fear and this is considered best among all other Rudraksha. By worshiping One Mukhi Savar Rudraksha, the desired fruits are received and the enemy itself is defeated. The person holding, wearing, or having this rudraksha is freed from all sorts of fears and malice. If a One Mukhi Savar Rudraksha is kept in a golden chain, then it is considered very auspicious and by wearing it on the neck there is no shortage of money. Heart spine disorders, lung problems, eyes disorders, and veins problems are removed by wearing this.

Benefits of  One Mukhi Double Savar Rudraksha

Those who are holding this Rudraksha are always protected from malice and negativity. By holding this Rudraksha, the person is blessed by the grace of Shiva and his life becomes full of happiness and his personality becomes bolder. The disorder of the mind and body is destroyed and positivity is achieved by wearing this Rudraksh.

एक मुखी ,दो सवार रुद्राक्ष

एक मुखी दो सवार रुद्राक्ष, एक मुखी तथा अन्य मुखी रुद्राक्षों से मिल कर बनता है इसमें एक मुखी प्रधान माना जाता है । इसे देखने से ऐसा लगता है की एक मुखी रुद्राक्ष जुड़े हुए दूसरे रुद्राक्ष की सवारी कर रहा हो जिस कारन इसका नाम सवार रुद्राक्ष पड़ा । यह रुद्राक्ष बहुत ही दुर्लभ है और आसानी से नहीं मिलता है और इसके प्रभाव को एक मुखी रुद्राक्ष के सामान माना जाता है यह साक्षात भगवान शिव का रुप माना जाता है । इसमें स्वयं भगवान शिव विराजमान माने गये हैं ।

एक मुखी सवार रुद्राक्ष के बारे में कहा जाता है कि इसके दर्शन मात्र से ही मानव का कल्याण होता है और पूजन से या धारण करने से क्या नहीं हो सकता, जिस घर में एक मुखी सवार रुद्राक्ष होता है वहां लक्ष्मी जी का आगमन हमेशा रहता है तथा इसके धारणकर्ता को कभी कोई नुकसान या भय नही रहता, ये सभी प्रकार के रुद्राक्षों में सर्व़श्रेष्ठ माना जाता है । एक मुखी सवार रुद्राक्ष की पूजा करने से मनवांछित फल प्राप्त होते हैं और शत्रु खुद ही पराजित हो जाते है । एक मुखी सवार रुद्राक्ष से मानसिक शान्ति मिलती है और यह पाप तथा संकटों को हर लेता है । एक मुखी सवार रुद्राक्ष यदि स्वर्ण जड़ित हो या सोने की चेन में लगा हो तो बहुत ही शुभ होता हैं और इसे गले में रखने से धन-धान्य की कभी कोई कमी नहीं रहती है ।

एक मुखी दो सवार रुद्राक्ष के फायदे

शिव स्वरुप होने के कारन इस रुद्राक्ष को धारण करने वालों सदा शिव की कृपा होती है तथा एक मुखी रुद्राक्ष से हार्ट, स्पाईन के विकार, फेफड़ों की समस्या, आंखों के विकार और नसों की प्राबलमों को दूर करने में सहायक हो सकता है ।  मन के विकार और नकारात्मकता इस रुद्राक्ष को धारण करने से नष्ट हो जाते हैं ।

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